मृत्यु के बाद भी दस्तावेजों में इस्तेमाल होता रहा सत्यवीर सिंह का नाम, जांच में खुलासा

नोएडा – सेक्टर-73 स्थित एंथूरियम ऑफिस प्रोजेक्ट की ऑलॉटी वेलफेयर एसोसिएशन (AOWA) से जुड़े मामले में एक गंभीर मामला सामने आया है। जांच में खुलासा हुआ है कि दिवंगत आवंटी सत्यवीर सिंह के निधन के बाद भी उनके नाम और कथित हस्ताक्षर का इस्तेमाल एसोसिएशन के गठन से जुड़े दस्तावेजों में किया गया। इस तथ्य के सामने आने के बाद पूरे मामले की जांच की गई।

डिप्टी रजिस्ट्रार, फर्म्स, सोसायटीज एवं चिट्स द्वारा जारी आदेश के अनुसार, एसोसिएशन के पंजीकरण के लिए जमा कराए गए अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) में करीब 60 सदस्यों के नाम और हस्ताक्षर दर्शाए गए थे। जांच में पता चला कि यूनिट-803 के आवंटी सत्यवीर सिंह का 11 जून 2025 को निधन हो चुका था, लेकिन इसके बावजूद उनके नाम को सदस्य सूची में शामिल किया गया और उनके हस्ताक्षर भी दर्शाए गए।

आदेश में कहा गया है कि इस संबंध में शिकायत मिलने के बाद विभाग ने पूरे मामले की जांच की। जांच के दौरान एसोसिएशन से कई बार स्पष्टीकरण और आवश्यक दस्तावेज मांगे गए। उपलब्ध रिकॉर्ड और प्रस्तुत दस्तावेजों का परीक्षण करने पर यह तथ्य सामने आया कि दिवंगत व्यक्ति के नाम का उपयोग किया गया था, जिसे गंभीर अनियमितता माना गया।

जांच के दौरान केवल सत्यवीर सिंह के नाम के इस्तेमाल का ही मामला नहीं, बल्कि एसोसिएशन के गठन से जुड़े अन्य दस्तावेजों और दावों में भी कई विसंगतियां सामने आईं। हालांकि, दिवंगत व्यक्ति के नाम और कथित हस्ताक्षर का इस्तेमाल इस पूरे प्रकरण का सबसे गंभीर पहलू माना गया।जांच के दौरान यह भी सामने आया कि कथित फर्जीवाड़े के आधार पर बनाई गई एसोसिएशन में कल्पना सचान, शशांक कुमार, नीरजा सिंघल, पारुल जैन, दिव्या गौतम, साहिल राणा, नीरज कुमार सिंघल, रविंदर कुमार वांवरिया और मोहम्मद महादिम हुसैन को पदाधिकारी दर्शाया गया था। वहीं, इस पूरे प्रकरण में अनूप सचान, प्रशांत टंडन, सुनील छजेरा, अनुराग योहे, चंदर रुखेजा और पियूष अग्रवाल के नाम भी सामने आए हैं।

विभाग ने जांच रिपोर्ट और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर नियमानुसार आगे की कार्रवाई की है। यह मामला सोसायटी गठन की प्रक्रिया में दस्तावेजों की सत्यता और पारदर्शिता पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।