विवेक शर्मा,
पौड़ी गढ़वाल (उत्तराखंड):देवदार के घने जंगलों के बीच स्थित ताड़केश्वर महादेव मंदिर अपनी दिव्य आध्यात्मिक आभा और प्राचीन धार्मिक मान्यता के कारण देशभर के श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है।
वर्षभर यहां दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है,जबकि सावन,महाशिवरात्रि तथा अन्य विशेष अवसरों पर हजारों श्रद्धालु मंदिर पहुंचते हैं।

लेकिन बढ़ती श्रद्धालुओं की संख्या के अनुरूप बुनियादी सुविधाओं का विकास नहीं हो पाने से स्थानीय होटल व्यवसायियों,मंदिर प्रशासन और श्रद्धालुओं को अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि सरकार इस क्षेत्र का सुनियोजित विकास करे तो ताड़केश्वर महादेव धार्मिक पर्यटन का एक प्रमुख केंद्र बन सकता है,जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा और राज्य के राजस्व में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
राज्य राजमार्ग से ताड़केश्वर महादेव मंदिर की ओर जाने वाला लगभग पांच किलोमीटर लंबा संपर्क मार्ग श्रद्धालुओं के लिए सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है।
स्थानीय होटल व्यवसायियों के अनुसार सड़क कई स्थानों पर जर्जर और संकरी है।
एक ओर गहरी खाई और दूसरी ओर चट्टानी पहाड़ होने के कारण दुर्घटनाओं का खतरा हमेशा बना रहता है।उनका कहना है कि सड़क का चौड़ीकरण,मरम्मत, रात्रि में दृश्यता के लिए रिफ्लेक्टर तथा खाई की ओर सुरक्षा रेलिंग लगाई जाना अत्यंत आवश्यक है।
उनका कहना है कि उत्तराखंड की अधिकांश पर्वतीय सड़कों पर सुरक्षा रेलिंग उपलब्ध हैं, लेकिन मंदिर तक जाने वाले इस महत्वपूर्ण मार्ग पर इनका अभाव साफ दिखाई देता है।
स्थानीय होटल संचालकों ने बताया कि गुँडालखेत गांव से मंदिर की ओर बढ़ते समय,विशेषकर यात्रा सीजन में,वाहनों की लंबी कतारें लग जाती हैं।
कई बार श्रद्धालुओं को घंटों जाम में फंसना पड़ता है और कुछ लोग बिना दर्शन किए ही वापस लौट जाते हैं। उनका कहना है कि यदि सड़क को व्यवस्थित किया जाए और पार्किंग की बेहतर व्यवस्था हो तो इस समस्या का काफी हद तक समाधान हो सकता है।
होटल व्यवसायियों ने बताया कि ताड़केश्वर मंदिर के आसपास कई ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व के स्थल तथा प्राचीन संरचनाएं मौजूद हैं,जिनका आज तक समुचित विकास नहीं हो पाया है।
यदि उत्तराखंड पर्यटन विभाग इन स्थलों को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करे तो श्रद्धालु और पर्यटक अधिक समय तक इस क्षेत्र में ठहरेंगे।इससे स्थानीय होटल,दुकानों और अन्य छोटे व्यवसायों को बढ़ावा मिलेगा, युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और राज्य के राजस्व में भी वृद्धि होगी।
क्षेत्र में पेयजल की समस्या भी स्थानीय लोगों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।होटल संचालकों के अनुसार उन्हें पानी टैंकरों के माध्यम से मंगवाना पड़ता है, जिससे संचालन लागत काफी बढ़ जाती है।
उन्होंने सरकार से स्थायी पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है ताकि स्थानीय व्यवसायियों और श्रद्धालुओं दोनों को राहत मिल सके।
सार्वजनिक शौचालयों का अभाव भी श्रद्धालुओं,विशेषकर महिलाओं, के लिए बड़ी समस्या बन गया है।होटल व्यवसायियों का कहना है कि अक्सर महिलाएं होटल संचालकों से शौचालय उपयोग करने का अनुरोध करती हैं।
पहाड़ की अतिथि-सत्कार की परंपरा के कारण वे किसी श्रद्धालु को मना नहीं करना चाहते, लेकिन सीमित संसाधनों और महंगे पानी के कारण उन्हें आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।उनका कहना है कि सरकार को मंदिर मार्ग और पार्किंग क्षेत्र के आसपास सार्वजनिक शौचालयों की व्यवस्था शीघ्र करनी चाहिए।
होटल व्यवसायियों ने बताया कि इन सभी समस्याओं को लेकर उन्होंने पूर्व जिलाधिकारी आशीष चौहान से भी मुलाकात की थी और सड़क,पार्किंग, पेयजल,शौचालय तथा अन्य मूलभूत सुविधाओं के विकास की मांग रखी थी।
हालांकि उनके स्थानांतरण के बाद अब स्थानीय लोग नए जिलाधिकारी के समक्ष भी इन मुद्दों को प्रमुखता से उठाने की तैयारी कर रहे हैं।
मंदिर के पुजारी ने भी क्षेत्र की समस्याओं पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि सरकारी पार्किंग का विकास वर्षों से अधूरा पड़ा है।उन्होंने बताया कि उचित जल निकासी व्यवस्था नहीं होने के कारण बरसात के दौरान सड़क पर जलभराव हो जाता है,जिससे यातायात प्रभावित होता है और लंबा जाम लग जाता है। इसके कारण कई श्रद्धालु मंदिर तक पहुंच ही नहीं पाते और बीच रास्ते से ही वापस लौट जाते हैं।
पुजारी ने कहा कि मंदिर प्रशासन अपने स्तर पर श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए हर संभव प्रयास करता है, लेकिन सड़क,पार्किंग,शौचालय,पेयजल और यातायात जैसी मूलभूत सुविधाओं का विकास सरकार और प्रशासन के सहयोग के बिना संभव नहीं है।
उन्होंने बताया कि पार्किंग क्षेत्र के पास सार्वजनिक शौचालय बनाए जाने की आवश्यकता है, लेकिन वन विभाग की भूमि संबंधी आपत्तियों के कारण यह कार्य वर्षों से आगे नहीं बढ़ पा रहा है।
उन्होंने उत्तराखंड सरकार से आग्रह किया कि ताड़केश्वर महादेव मंदिर और इसके आसपास के क्षेत्र को धार्मिक एवं पर्यटन की दृष्टि से समग्र रूप से विकसित किया जाए।
उनका कहना है कि इससे स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा, पहाड़ों से होने वाले पलायन पर रोक लगेगी, श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी और उत्तराखंड सरकार के राजस्व में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
(यह रिपोर्ट संवाददाता विवेक शर्मा द्वारा ताड़केश्वर महादेव मंदिर क्षेत्र के स्थानीय होटल व्यवसायियों एवं मंदिर के पुजारी से की गई बातचीत और स्थल पर किए गए अवलोकन पर आधारित है।).
लीनआस्था के केंद्र ताड़केश्वर महादेव को विकास का इंतजार, श्रद्धालु झेल रहे मूलभूत सुविधाओं का अभाव.



