भूटान सरकार ने कोविड-19 को लेकर अंतरराष्ट्रीय सीमावर्ती क्षेत्रों को आगमन को बंद करने के उपरांत दोनों देश की संबंध में अड़चनें आने की संकेत

राजेश शर्मा

पश्चिम बंगाल राज्य का उत्तर बंगाल क्षेत्र में   प्रख्यात  व्यापारिक केंद्र  के नाम से  अंतरराष्ट्रीय बाजार में  प्रचलित जलगांव शहर  अब  सन्नाटा की ओर  मंडराने लगा है।  जिसका मुख्य कारण इस क्षेत्र कोविड-19 के उपरांत यह क्षेत्र में भारत के मित्र राष्ट्र भूटान के खरीददारी  करने वाले उन तमाम ग्राहकों की आपूर्ति कम होने के कारण इस क्षेत्र में छोटे छोटे व्यापारी, एवं इस क्षेत्र के दैनिक काम करने वाले उन गरीब जनता ओं के ऊपर काफी बुरा असर पड़ा हुआ है।  यह क्षेत्र एक ऐसा क्षेत्र है भारत के मित्र राष्ट्र भूटान के साथ मित्रता हुआ है ।  इस क्षेत्र से भारत के मित्र राष्ट्र भूटान में  राष्ट्र को आवश्यक हेतु संपूर्ण सामग्री निर्यात होता है ।

  बल्कि यह क्षेत्र में कोविड-19 का लॉकडाउन 25 मार्च से आरंभ हुआ इस 25 मार्च के उपरांत आज तक भारत ने भूटान को सहयोग के बहाने भारत के विभिन्न प्रांतों से काफी सामान निर्यात करते आ रहे हैं ।  बताया जाता है कि यह क्षेत्र अंतर्राष्ट्रीय सीमावर्ती क्षेत्र से सटा हुआ है जबकि क्षेत्र में भारत के पड़ोसी मित्र राष्ट्र भूटान के भूटानी नागरिक काफी मात्रा में पिछले दिनों में आगमन करने के उपरांत यह व्यापार बनर्जी बृहद रूप में चलता था जिसके चलते इस क्षेत्र में रहने वाले संपूर्ण छोटे एवं बड़े स्तर के लोगों को अपना जीवन यापन करने में सुविधा होती थी । भारत एवं भूटान के मैट्रिक संधि 8 फरवरी 1949 में आरंभ हुआ था, 2 मार्च 2007 को हुआ था। इसी दोनों देश के संधि युक्ति पत्र के दौरान दोनों देश के नागरिकों को समान मान्यता प्राप्त हेतु  सहमति हुआ था।

(अनुच्छेद 5)भूटान सरकार और भारत सरकार सहमत हैं कि भारतीय क्षेत्रों में रहने वाले भूटानी विषयों में भारतीय विषयों के साथ समान न्याय होगा, और भूटान में रहने वाले भारतीय विषयों को भूटान सरकार के विषयों के साथ समान न्याय होगा।)

जिसके तहत भूटानी नागरिक भारत के किसी भी प्रांत में जाने के लिए कोई पास हुआ कोई परमिट नहीं लागू होती है परंतु भारतीय नागरिक भूटान के किसी भी प्रांत में जाने के लिए भूटान के  इमीग्रेशन विभाग द्वारा प्राप्त स्वीकृति पत्र के मार्फत ही भूटान के 2 क्षेत्रों में भ्रमण कर सकते हैं  पहला थिंफू  दूसरा पारो।  तथा पिछले दिनों में यह क्षेत्र में भूटानी नागरिक काफी किराए के मकानों में रहते थे, बल्कि  कोविड-19 बहाना बनाकर भूटान सरकार ने भारत के साथ में कूटनीतिक योजना अनुरूप उन भारत में रहने वाले तमाम भूटानी नागरिकों को भूटान सरकार ने निर्देश देकर भारत छोड़ने की हुकुम जारी कर दिया था जिसके तहत इन दिनों भारत के किसी भी क्षेत्र में भूटानी नागरिकों को रहना भूटान सरकार द्वारा अमान्य कर दिया है। ज्ञात हो कि भारत से ही भूटान में इन  कोविड-19 दौरान संपूर्ण सामग्री खाद्य से लेकर उन तमाम सामग्रियों को खुला रूप में अन्य राष्ट्रीय के तुलना में से ज्यादा सामान निर्यात किया गया।

बल्कि उन सामान ले जाने पर उन लोगों को कोविड-19 का भय नहीं हुआ । परंतु अंतरराष्ट्रीय सीमावर्ती क्षेत्र में से उन तमाम भूटानी नागरिकों को भारत के तरफ आने में पूर्ण रूप से पाबंदी लगाई गई है जिससे दोनों देश की आपसी संबंध में आने वाले दिन पर काफी अर्चन यानी कि संकेत दिखाई दिया जा रहा है ।  जबकि भूटान में रहने वाले उन तमाम उठानी नागरिकों के साथ में दूरभाष पर बातचीत करने पर कहते हैं कि हमारे यहां मन नहीं लगता है जबकि भारत हमारा मित्र राष्ट्र है ,परंतु भूटान सरकार की निर्देशानुसार हम लोगों को भारत जाने में रोक लगाया गया है तथा भारत में किराए के मकान में रहने के लिए भी भूटान सरकार ने पूर्ण रूप से बंद कर दिया है जिसका निर्देश अनुसार  इन दिनों उन तमाम भूटानी नागरिकों ने भारत छोड़कर स्वदेश लौटना मजबूर होने की।

जबकि दोनों देश की आपसी संबंध के बाद आते हैं,तो दोनों देश के नागरिकों की जमीनी स्तर में संबंध अच्छा होना चाहिए जिसका जिक्र भूटान के वर्तमान नरेश एवं वर्तमान प्रधानमंत्री ने पिछले कुछ दिनों आगे अपने सरकारी पत्र-पत्रिका द्वारा सूचना प्रकाशन में लाया था  । इसी सिलसिले को मध्य नजर करते हुए वर्तमान अवस्था में भूटान सरकार ने उसका ठीक विपरीत कोविड-19 को बहाना बनाकर दोनों देश के नागरिकों के संबंध में  अड़चन लाने की काम कर रहे हैं। इसी संबंध में स्थानीय जनता ओं का कहना है कि भारत एवं भूटान एक महत्वपूर्ण देश है जिसके मद्देनजर रखते हुए आज के दिनों में भूटान द्वारा भारत के साथ में संबंध बिगड़ने के लिए  भूटान सरकार ने  अपना देश का अंतरराष्ट्रीय सीमा को पूर्ण रूप से सील कर दिया है । परंतु भूटान सरकार ने भारत सरकार को ग्वार लगाकर लॉक डाउन की प्रथम दिन से ही भूटान में संपूर्ण सामान निर्यात करते आ रहे हैं जिसके चलते इस क्षेत्र में लॉक डाउन का पूर्ण रूप से धज्जियां उड़ी हुई थी ।

जिसकी परवाह करते हुए पश्चिम बंगाल सरकार एवं भारत सरकार ने भूटान को सहयोग पहुंचाने के लिए संपूर्ण सामान निर्यात में छूट दिया था। बदले में भूटान सरकार ने भारतीय नागरिकों के साथ में एक अनदेखी करते हुए सदियों से राते आ रहे हैं भूटानी नागरिकों को उन सीमावर्ती क्षेत्रों से हटके भूटान के अंदर बैठने के निर्देश जारी करने के बावजूद भारतीय नागरिक एवं भूटानी नागरिक के  बीच आपसी संबंध में काफी और  अड़चने आने की संकेत  दिखाई देने लगी है।

 जिसको लेकर स्थानीय जयगांव के बाशिंदों ने एक बैठक किया है, इस संबंध को भारत सरकार के समक्ष एक पत्र द्वारा अर्जित करने जा रहे हैं जो कि भारत एवं भूटान के संबंध ना बिगड़े जो भूटान सरकार बिगाड़ने की प्रयास कर रहे हैं जिसका मध्य नजर करते हुए आने वाले दिन में यह अंतरराष्ट्रीय सीमावर्ती क्षेत्र को पिछले  कई सालों से  चलते ही आ रहे हैं नियमों को पूर्ण रूप से पालन करने के लिए दोनों देश के समाधि बने रहे, जिसके लिए भूटान सरकार ने अपना अंतरराष्ट्रीय सीमावर्ती क्षेत्र में भारतीय नागरिकों को एवं भूटानी नागरिकों को पिछले दिनों के तहत खुला रूप से आगमन की छूट देना चाहिए नहीं तो आने वाले दिनों में दोनों देश की संबंध में  मधुरता में  विभाजन आने की संकेत है।  जबकि भारत का पड़ोसी नेपाल के साथ में इन दिनों संबंध खराब होते जा रहे हैं भूटान ने भी अपना कूटनीतिक  दृश्य इस तरह से दर्शा रहे हैं जिससे यह मालूम होता है कि भूटान आने वाले दिनों में भारतीय नागरिकों के साथ में  संबंध विच्छेद करने में तुले हुए हैं । जिसका प्रमाण यह है कि  भूटान के उच्च सदन एवं निम्न सदन ने एक नियम  पारित किया है भारतीय नागरिकों को अब भूटान में भ्रमण करने के लिए प्रति  दिन 1200   रुपया एक आदमी को देना होगा उसके उपरांत भूटान में रहा उन तमाम गुंबा एवं पर्यटकों ने देखने वाले स्थानों में भी  कर देने के उपरांत ही जो नियम बनाई है ।  जिसे यह मालूम हो रहा है कि भूटान अब  भारत के साथ दोस्ती आना को  बदलाव लाने की  नए तौर तरीके अपना रहे हैं।

  जिसमें भारत सरकार द्वारा नियुक्ति की गई भारतीय राजदूत आवास के प्रतिनिधियों का भी भूटान का ही  उन योजनाओं को  मदद पहुंचाते हुए दिखाई दे रहा है।  जबकि पिछले भारत स्वाधीन होने के उपरांत हुआ भारत एवं भूटान की संधि स्थापन होने के बाद उन भारतीय राजदूत आवास में काम करने वाले प्रतिनिधियों के समय में सीमावर्ती क्षेत्रों पर रहने वाले भारतीय नागरिकों के साथ में आपसी संबंध को लेकर कार्यक्रम किया जाता था।  परंतु वर्तमान उन भारतीय राजदूत आवास व वाणिज्य दूतावास के प्रतिनिधियों ने भारत के प्रतिनिधि होने के बावजूद सीमावर्ती क्षेत्र में आने वाले भारतीय नागरिकों को भूटानी नागरिकों के साथ आपसी संबंध बिगड़ने में तुले हुए ।  इस विषय को लेकर भारत सरकार के संबंधित विभाग ने उठाए तो आने वाले दिनों में दोनों देश के संबंध में कुछ खराब दृश्य देखने को मिलने के संकेत दिखाई दे रहा है ।