एक मंच पर आए एशिया के अग्रणी सोशल इनोवेटर्स और बिज़नेस लीडर्स 

एक मंच पर आए एशिया के अग्रणी सोशल इनोवेटर्स और बिज़नेस लीडर्स

नई दिल्ली – दुनिया के अग्रणी सामाजिक उद्यमियों के सबसे बड़े वैष्विक संगठन अशोक इंडिया की ओर से नोवोटेल, एरोसिटी में 27 और 28 अक्टूबर को  आयोजन किया गया। यह एक ऐसा प्लेटफाॅर्म है जो सहानुभूति एवं बदलाव लाने पर ध्यान केंद्रित करने के लिए दुनिया के कुछ सबसे असाधारण सोशल इनोेवेटर्स – अशोका फेलोज़- को सर्वाधिक दूरदर्शी बिज़नेस लीडर्स से मिलने के लिए एक मंच पर लाता है।

भारत सरकार के पूर्व सचिव  अनिल स्वरूप ने इस अवसर पर मुख्य वक्ता के तौर पर कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई। अपने संबोधन में श्री स्वरूप ने कहा, ‘‘मेरा हमेशा से मानना है कि सीखने के लिए बहुत कुछ होता है। आप में से हरेक में बदलाव लाने की काबलियित है लेकिन सभी अच्छे लोगों को एक साथ आने की जरूरत है। तो आइये, अच्छा करने के तंत्र से जुड़ें! मैं इस षानदार प्रयास के लिए अशोका टीम को बधाई देता हूँ ।

सत्र सहानुभूति और चेंजमेकिंग पर केंद्रित थे, जिन विषयों पर चर्चा की गई, उनमें से कुछ हैं:

व जटिल और तेजी से बदलती दुनिया में सहानुभूति
व बदलाव की कहानियां:बुनियाद के रूप में सहानुभूति
व ट्रैफिकिंग या तस्करी के पीड़ितों के प्रति मुख्य संस्थानों के बीच सहानुभूति कायम करना
व सहानुभूति पूर्ण नीतियों की दिशा में कानून निर्माताओं और एलजीबीटीक्यू समुदायों के बीच संबंध कायम करना

इस अवसर पर श्री सुनीश जौहरी, इंडिया लीडर ने कहा, ‘‘हम जिस दौर में है उसमें दुनिया तेजी से बदल रही है और हमारे आसपास की समस्याएं भी उस रफ्तार से बढ़ रही हैं जिनके हिसाब से हम तैयारी नही कर पा रहे हैं और न ही उनका अंदाज़ा लगा पा रहे हैं। लिहाज़ा, हमें इन

समस्याओं के समाधान के लिए जिन दक्षताओं की जरूरत है वे अशोका से फर्क हैं और हमारा मानना है कि सहानुभूति वास्तव में, तमाम दक्षताओं की बुनियाद है जो कि दुनियाभर में किसी भी

व्यवसाय, सामाजिक उपक्रम अथवा किसी भी टैक्नोलाॅजी में बदलाव ला सकती है।  अशोका की पहल है जो अशोका फैलोज़ और बिज़नेस लीडर्स को एक छत के नीचे लाने के मकसद से की गई ताकि हम सभी एक-दूसरे से सीख सकें।‘‘

विष्णु स्वामिनाथन, दक्षिण एशिया प्रतिनिधि/ग्लोबल पार्टनरशिप लीडरशिप ग्रुप मेंबर, अशोका ने कहा, ’’अशोका की दृष्टि के अनुसार हर व्यक्ति बदलाव ला सकता है। जब हमने भविश्य की इस जरूरत को समझा कि दुनिया में बदलाव लाने वालों की आवश्यकता है और हरेक को परिवर्तक बनने की दक्षता होनी चाहिए। हमने मुड़कर यह आकलन किया कि हमारे फैलोज़ कैसे बदलाव के वाहक बन सकते हैं, या खुद बदलाव ला सकते हैं? और तब हमें समझ आया कि बदलाव लाने की दिषा में सबसे महत्वपूर्ण कदम सहानुभूति आधारित जीवनशैली हो सकता है। और अगर सहानुभूति ही बदलाव लाने का जरिया बनने के लिए आवश्यक दक्षता है तो आप इस बात का आकलन कैसे करेंगे कि इस दुनिया में बढ़ने वाला हर बच्चा किस प्रकार से समझें कि सहानुभूति क्या होती है। हमने यहीं से शुरूआत की। यह आयोजन सामाजिक बदलाव लाने वाले लोगों को एक मंच पर लाने के लिए है। हम उन्हें अषोका फैलोज़ या अग्रणी सामाजिक उद्यमी कहते हैं जिन्हें व्यावसायिक उद्यमियों के साथ लाकर हम यह देखना चाहते हैं कि परिवर्तकों से भरपूर भविश्य कैसा होगा। हम कैसे यह सुनिष्चित करें कि हर व्यक्ति बदलाव की दक्षता को अपनाए? यही आज इस आयोजन का बुनियादी आधार है और यही अशोका के मूल में है।‘‘

लाखों लोगों के जीवन को प्रभावित करने वाले अशोक फैलोज़ का वेल्थ एवं वैल्यू सृजित करने में मदद करने वाले विशिष्ठ बिज़नेस लीडर्स के साथ मंच साझा करना, अनूठा और अद्भुत है। अशोका फैलोज़ में शामिल कुछ लोगों में कैलाश सत्यार्थी, मोहम्मद यूनुस, शाहीन मिस्त्री, हरीश हांडे, जेरू बिलिमोरिया, चंद्रशेखर घोश और जैक सिम जैसे नाम शामिल हैं, जिनमें से प्रत्येक को लोगों के जीवन में व्यापक प्रभाव डालने का श्रेय जाता है।

कार्यक्रम में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने व