दुनिया के इतिहास में यह पहली बार होगा कि जिन देशों ने आतंकवाद फैलाने के जुर्म में तालिबान के सदस्यों पर संयुक्त राष्ट्र का प्रतिबंध लगवाया उन्हीं देशों के प्रतिनिधि अब उन आतंकियों के साथ समकक्ष के तौर पर बात करेंगे… तालिबान की तरफ से मंगलवार को जिस अंतरिम सरकार के गठन का एलान किया गया है, उसमें पीएम अखुंद, दोनों डिप्टी पीएम मुल्ला बरादर और अब्दुल सलाम हनफी, गृह मंत्री सिराजुद्दीन हक्कानी, विदेश मंत्री अमीर खान मुत्तकी संयुक्त राष्ट्र की तरफ से प्रतिबंधित आतंकी हैं… सिराजुद्दीन हक्कानी के बारे में सूचना देने पर तो अमेरिकी सरकार की तरफ से इनाम घोषित है… असलियत में तालिबान सरकार में एक साथ इतने सारे आतंकियों के शामिल होने से आतंकवाद के खिलाफ यूएन के तत्वाधान में चलने वाले मुहिम पर भी गंभीर सवाल उठ खड़े हुए हैं… इन सभी को आतंकी घोषित करवाने में अमेरिका की भूमिका काफी महत्वपूर्ण रही है लेकिन बहुत जल्द ही अमेरिका के विदेश मंत्री को उनकी ही सरकार की तरफ से घोषित आतंकियों से वार्ता करते हुए देखा जा सकता है… इनमें से कई तालिबानी नेताओं पर अमेरिकी सरकार ने अपनी तरफ से अलग से इनाम घोषित किया हुआ है… जाहिर है कि अमेरिका को इसमें रियायत देनी होगी… यही नहीं जिस संयुक्त राष्ट्र ने प्रस्ताव पारित कर अखुंद और मुत्तकी को अंतरराष्ट्रीय आतंकी घोषित किया, उसी की सालाना सम्मेलन को अब ये दोनों संबोधित कर सकते हैं…
