भारत में राजनैतिक दलों को किसी तरह की सीधी सरकारी फंडिंग नहीं मिलती है. हालांकि पार्टियों को चलाने और चुनाव लड़ने में दूसरे तरीके से मदद मिलती है, जिसमें बड़ी पार्टियों के लिए दफ्तर की जगह, राजनैतिक दलों की आय पर टैक्स छूट, कुछ शर्तों के साथ चंदे पर टैक्स छूट शामिल है.
2014 के चुनाव में भी खूब बहा पैसा
सेंटर फॉर मीडिया स्टडीज के आकलन के मुताबिक भारत में 2014 के लोकसभा चुनाव की कैंपेनिंग पर करीब 5 अरब डॉलर यानी 33 हज़ार करोड़ रुपये खर्च किए गए. जो अमेरिका में 2012 के राष्ट्रपति चुनाव की कैंपेनिंग से ज़्यादा है, जिसमें 4 अरब डॉलर यानी 27 हज़ार करोड़ रुपये खर्च हुए थे.
अमेरिका में तो 2016 के राष्ट्रपति चुनाव की कैंपेनिंग का खर्च 6.8 अरब डॉलर यानी करीब 44 हज़ार करोड़ रुपये पहुंच चुका था. बहुत संभव है कि भारत में 2019 के लोकसभा चुनाव का खर्च अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के खर्च को भी पार कर जाएगा.
2014 के चुनाव में जो चुनाव आयोग को खर्च का आधिकारिक आंकड़ा दिया गया था उसके मुताबिक चुनाव प्रचार में
बीजेपी ने 714 करोड़ रुपये
कांग्रेस ने 516 करोड़ रुपये
एनसीपी ने 51 करोड़ रुपये
बीएसपी ने 30 करोड़ रुपये
सीपीएम ने 19 करोड़ रुपये खर्च किए थे.
नियमों के मुताबिक राजनैतिक दलों को चुनावी खर्च का ब्यौरा विधानसभा चुनाव होने के 75 दिन के अंदर और लोकसभा चुनाव होने के 90 दिन के अंदर देना होता है. लेकिन चुनाव आयोग को करीब 20 पार्टियों को नोटिस जारी करना पड़ा था, क्योंकि वो अपने खर्च का ब्यौरा देने में आनाकानी की सोच दिखा रहे थे.

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