ए लाईफ अन कॉमन दे इंडिकेवल बी एस बेदी जर्नी ऑफआन आई पी एस आफिसर ” – खबरी लाल

आसमा वर्षो से वर्षो तक बढ़ता है तब खाक के फलग से कोई इंसान इस जमीन पर दुनिया ‘ वालो को प्रेम ,कर्तव्य,शांति भाई चारे व सोहार्द का संदेश ले कर भेजता है।डा0 बलवीर बेदी सेवा निवृत 1961 यू पी बैच के भारतीय पुलिस सेवा केडर आफिसर थें । डा० बलवीर सिंह बेदी ईसान व इन्सानियत के जीती जागती उदाहरण थें।आप की पहचान एक भारतीय पुलिस सेवा में कर्तव्य निष्ट,अधिकारी थे ,वही अपने परिवार व समाज के लिए सच्चे व नेक इंसान थे।मैने उन्हे नजदीक से ना केवल देखा है ब्लकि कई यादगार पल भी गुजारे है।उपरोक्त उदगार आज नई दिल्ली के इतिहासिक जन्तर मन्तर मार्ग पर स्थित केरला हाउस के सभागार मे डा० बलवीर सिंह वेदी के जीवन पर आधारित बायोग्राफी ‘ ए लाईफ अनकामन ‘ बी एस बेंदी दे इंडिकेवल जर्नी ऑफ ऑन आई पी एस आफिसर ” डा० प्रीति सिंह द्वारा लिखी गई पुस्तक का विमोचन कार्यक्रम था
इस अवसर पर मुझे भी अपने बरिष्ट मीडिया मित्रों के साथ कुछ स्वर्णिम पल बिताने व साक्षी बन नें का सुअवसर मिला ।
पुस्तक का प्रकाशन दिशा इन्टर नेशन पब्लिर्स हाउस ‘ ग्रेटर नोएडा के द्वारा कुशल प्रकाशन वसंपादन किया गया है।पुस्तक की साज व सज्जा सजिल्द प्रकाशित किया गया है। पुस्तक की कीमत 390 /= है।पुस्तक ऑन लाईन एमोजन एप पर भी उपलब्ध है।
आशा है कि पुस्तक अपने पाठकों को ना केवल प्रेरणा देगी ब्लकि उनके जीवन में मार्गदर्शन के साथ पथ प्रदर्शक का कार्य करेगी |
सन1961 यु पी बैच के आई पी एस पिता के जीवन पर आघारित वायोग्राफी के रूप पुस्तक के माध्यम से प्रेरणा दायक कहानी एक पुत्री के कलम से लिपि बद्ध की गई है।
विश्व के मानस पटल पर भारत विभिन्नता में एकता व अखण्डता के लिए प्रख्यात है।यहाँ की वेष भुषा व भाषा अलग अलग ही हो लेकिन सबके दिल राष्ट्रप्रेम की भावना से ओत प्रोत है।हमारी संस्कृति व सभ्यता का परचम पुरे विश्व में पहरा रहा है।इसके साथ यहाँ के बदलते मौसमअपने साथ पर्व त्योहार ‘क्षेत्रीय साज व संगीत के दीवाने भारत के अलावे कई देशों मे है।इसी क्रम में आज ऋतु बसंत के खुशनुमा माहोल में राजधानी के ऐतिहासिक जनपथ मार्ग केरला हाउस में अपने कुछ वरिष्ट संपादक व मीडिया मित्रो के सानिध्य सम्मापीय में जीवन के स्वर्णिम पल बिताने का सौभाग्य प्राप्त हुआ विगत दिनों हमें मिला ‘
मौका था।डाo बलबीर सिंह बेंदी आई पी एस के जीवन पर आधारित लिखित पुस्तक के विमोचन समारोह का।इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप मंच पर विराजमान हो कर शोभा बड़ा रहे थे,केरल राज्य के महामहिम आरिफ मो खान थे,जिनसे मिलने का सौभाग्य मुझे पूर्व में कई बार हो चुका है।मै आरिफ साहब के विषय मे संक्षिप्त में इतना बताना चाहूंगा कि ये एक बे सहदय ही संजीदा व ख़ुश मियाज इंसान है। आज आप भले ही एक संवैधानिक महामहिम के पद आसीन है।इस अवसर पर केरल राज्य के महामहिम आरिफ मो०खान के कर कमलो द्वारा पुस्तक का विमोचन एक सादे समारोह नई दिल्ली स्थित केरला हाउस कै सभागार में किया है।
इस पुस्तक में डा० बेंदी के जीवन के उत्तार चढाव के संघर्ष व अनुभवो पर आधारित है।एक भारतीय पुलिस प्रसानिक सेवा पद पर रहते है। आप ने अपने धार्मिक ‘समाजिक व पारिवारिक द्वायत्वो का र्निवाह का इतना आसान नही था।फिर भी आपने अपने जीवन व सरकारी पदो के बीच में समझौता नही कर एक अनोखा सामजस्य स्थापित किया।
आप का भारत पाक के विभाजन समय अपने परिवार का पंजाब के सिन्ध प्रांत से भारत मे आगमन हुआ था , पुस्तक में विभाजन से वेदना के कारुणिक कहानी का सचित्र चित्रण किया गया है। लेखिका नें अपने पापा के सान्निध्य बताते हुए कहती है कि
जब मै तीन साल की थी ‘ पापा जालोन में SP के पद थें।वे रात रात भर घर से बाहर रहते थे |
मेरे मन मस्तिष्क पे वह धुमिल तस्वीरें आज भी है।जब मेरे से एक पैसा गुम हो गया और मेरी मॉ मेरे पें बहुत ही गुस्सा हो गई।
इसी क्रम मे मै आप सभी को एक समक्ष एक बात का जिक्र करना चाहूंगी घर पर पहली बार महिन्द्रा कम्पनी जीप आई थी।उस समय मगरू लाल जो कि रशोईयाँ थे ‘किरोसिन स्टोव पर देसी मुर्गा बनाने का आदेश दिया था – ‘
जम्मु – कश्मीर 1992 -1993 .
डी जे पी – पद रहे थें।
पुस्तक विमोचन समारोह मे केरला के महामहिम राज्यपाल आरिफ मो०खान साहव नें अपने उदगार व्यक्त करत हुए कहा कि बेदी जी समाज में अनुशासन प्रिय थे , मुझे प्रशन्नता हो रही है।मुझे व मेरी स्वर्गीया पत्नी केउनके काफी भी अच्छे तालुक थें।आज मुझे काफी ही प्रसन्नता हो रही है कि एक पुत्री के द्वारा अपने पिता पर बायोग्राफी लिखना इतना आसान नही होता है।डा० बलवीर सिंह वेदी एवं एक सच्चे कर्म निष्ट अनुसासन प्रिय पुलिश अधिकारी थें।एक शिक्षक को रूप में हमारा हमेशा सम्मान करते थे!
बच्चे के प्रति उन्होने अपनी जिम्मेदारी व प्रतिबद्धता निभाये करते रहते थें।जब वे मिलते थें तो अतिथि धर्म का पालन करते उनके सम्मान व खान पीने का विशेष ध्यान रखते थें।बेंदी साहब स्वयं खानें पीने वहुत शौकीन थें।जब कोई उनसे मिलने आते है।उनके ना केवल समान करते ब्लकि एक खुशनुमा माहोल मे हर तरह के मदद करने मे पीछे नही रहते थे।एक बार कहानी है,जब मै स्वयं उनसे मिलने आए थे।आप को बताना चाहूंगा कि जब उस समय अध्यन के लिए अपने घर से दुर रहते है।हास्टल में नास्ते मे डब्ल रोटी मिलते थें।जिससे खा-खा कर मन उब जाता था।ऐसे में कभी कभी एकआई पी एस के पुलिश अधिकारी(एस एस पी)के घर पर पराठे खाने मिलते है।उनसे मिलने का बहाने मात्र रहता था।घर का खाना मुख्य मकशद होता था।ये मिसेजे बेंदी का था।कानपुर में थोडी सी मोहलत मिली थी।
मुझे गर्व है बेदी साहब की पुत्री व पुस्तक के लेखिका प्रीति से ‘ जिन्होनें मुझे बड़े भाई के रूप हमेशा सम्मान दिया करती है।मेरा बेदी परिवार से पारिवारिक अच्छे सम्बन्ध रहा है।पिता-पुत्री का ये अनोखा अटूट सम्बन्ध समाज एक संदेश देता है।ज्यादातर पिता अपने पुत्र का होता है।लैकिन बेंदी साहब अपने बेटी के अच्छे पिता थें।ऐसे में मुझे महशुर शायर मीर साहब की एक शेर याद आ रही है खाक फलक व इंसान के संदर्भ में सही कहा कि- “जब आसमा में बर्षो से बर्षो तक बढता है तब खाक से फलक से खास इंसान निकल कर इस जमीं पर आता है।मानव को उसके जीवन के उद्देश्य पुरा करने का सीख देता है।डाo बलवीर सिंह बेदी जी भी ऐसे ही नेक इंसान व अच्छे पिता है!वे अभी स्वास्थ्य लाभ ले रहे है।अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर एक पुत्री द्वारा अपने आई पी एस पिता के जीवन पर आधारित बायोग्राफी लिख कर यह साबित कर ती है।आज की बेटी बेटे से किसी भी मयाने में पीछे नही है।
अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस पर नारी शक्ति को नमन ‘ वंदन व अभिनन्दन ।
अंत में अपने पाठकों से यह कहते हुए विदा लेते है कि
ना ही काहूँ सें दोस्ती , ना ही काहूँ से बैर । खबरी लाल तो माँगे सबकी खैर ॥
प्रस्तुति
विनोद तकियावाला
स्वतंत्र पत्रकार / स्तम्भकार