अटल सम्मान से सम्मानित हुए – हरिहर रघुवंशी

नई दिल्ली, 24 नवंबर। पूर्व प्रधान मंत्री के नाम से चलाये जा रहे अटल बिहारी फाउंडेशन की तरफ से आयोजित ‘8वां राष्ट्रीय अटल सम्मान समारोह’ मे दिल्ली प्रदेश भारतीय जनता पार्टी के सह मीडिया प्रभारी हरिहर खुवंशी को नई दिल्ली के कंस्चूशनल क्लब आयोजित समारोह अटल सम्मान 2021 से नावजाक गया। सर्व विदित रहे कि यह सम्मान समारोह भारत रत्न स्व. अटल बिहारी वाजपेयी की 97वीं जन्म जयंती की पूर्व संध्या पर आयोजित की गई । इस कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि केंद्रीय राज्य मंत्री अश्वनी कुमार चौबे, भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री दुष्यंत गौतम, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष आदेश गुप्ता एवं पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्री गोपाल कृष्ण अग्रवाल,अटल बिहारीफाउंडेशन के अध्यक्ष शसुशील राजा और सजग फाउंडेशन के चेयरमैन हरिहर रघुवंशी सहित अन्य पदाधिकारीगण मौजूद थे। इस अवसर पर विभिन्न क्षेत्रों में अपना महत्वपूर्ण योगदान देने वाले गणमान्यों को अटल विभूषण एवं अटल श्री सम्मान से नवाजा गया।
इस मौके पर सभा को संबोधित करते हुए अश्वनी चौबे ने स्व. अटल बिहारी बाजपेयी को याद करते हुए कहा कि अटल बिहारी बाजपेयी की आखिरी सभा मेरे क्षेत्र पटना के गांधी मैदान में हुई थी।जिस तरह से उन्होंने अपने राजनीति जीवन में देश हित के बारे में सोचा और जो कुछ भी उन्होंने देश के लिए किया उसे देश कभी नहीं भूल सकता है। उन्होंने कहा कि ‘सुशासन’ की नींव रखने वाले अटल बिहारी बाजपेयी जी ने कभी भी अपने वसूलों के साथ समझौता नहीं किया।
भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री दुष्यंत गौतम ने कहा कि अटल बिहारी बाजपेयी के जीवन से हमें बहुत कुछ सीखने को मिलता है। उन्होंने अपने पूरे जीवन काल में ना ही सिर्फ देश हित में काम किया है बल्कि पूरे देश का परचम खासकर राष्ट्रभाषा हिंदी का परचम विदेशों में भी लहराया है। उन्होंने कहा कि अटल जी हमेशा से राष्ट्रवाद और सनातन धर्म के अनुयायी रहे हैं लेकिन गांधी परिवार हमेशा से ही हिंदू विरोधी रहा है। आज उनके बताए हुए रास्तों पर चलकर उनकी सोच और सपनों को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पूरा कर रहे हैं।

प्रदेश भाजपा अध्यक्ष आदेश गुप्ता ने कहा कि अटल बिहारी बाजपेयी को उनकी कविताओं के माध्यम से समझा जा सकता है। वह जहां साहृदय थे वहीं कठोर फैसले लेने में भी चट्टान की तरह अडिग थे। उन्होंने कहा कि अटल जी का साफ कहना था कि दोस्त बदला जा सकता है लेकिन पड़ोसी नहीं। इसी को चरितार्थ करते हुए उन्होंने पाकिस्तान के साथ बेहतर रिश्ते बनाने की कोशिश की लेकिन जब उन्हें धोखा मिला तो उन्होंने कारगिल जैसे युद्ध जीतकर भी पड़ोसियों को मुंहतोड़ जवाब दिया।