रिश्ता

कितने ही पंछियों के नाम नहीं जानते
पेडो की प्रजाति नहीं जानते
हो सकता है वे हमे जानते हों
अपना भी मानते हों
हवा की चादर आसमान का साया
हमने उन्होंने साथ साथ पाया
साथ साथ झेली धूप छाँव
मीठी सी कुहू कुहू कसैली सी काँवी काँव
कितना कुछ तो है सांझा
हम एक चौहद्दी मे कैद
सुविधाएं जुटाने मे मुस्तैद
पहली फुहड़ मे बाहर पंछी चहचहाते
पेड झूम झूम जाते
चौहद्दी के भीतर आदमी
मन ही मन चहचहाता
झूम झूम जाता
फिर भी समझ नहीं पाता
आपस का नाता
पंछियों के नाम
पेडो के नाम
रिश्ते तमाम

अनीता श्रीवास्तव
अध्यापिका

सिंगरौली ( मध्य प्रदेश )