कब होंगे देश मे पत्रकारों के हित के चुनाव ?

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चुनावी वादे सब के लिए पर पत्रकारों के लिए कोई भी वादा किसी भी पार्टी का क्यों नहीं देश में पांच राज्यों में चुनाव हो रहे हैं इससे पहले  देश मे लोकसभा के चुनाव हुए पर कहीं पर भी किसी के भी मेनिफेस्टो में मीडिया सिक्योरिटी बिल या पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर कोई भी बात नहीं कही गई यहां तक कि न्यूजपेपर एसोसिएशन ऑफ इंडिया द्वारा कई बार माननीय प्रधानमंत्री सूचना प्रसारण मंत्रालय को कई बार पत्र लिखा जा चुका है कि अगर किसी पत्रकार की किसी कारणवश मृत्यु हो जाती है या फिर माफियाओं द्वारा गुंडों द्वारा उसका कत्ल कर दिया जाता है तो उसके परिवार को जीवन सुरक्षा चक्र का लाभ मिले जिससे कि उसके परिवार को कुछ सुविधाएं ऐसी मिल सके कि उसका परिवार अपना जीवन यापन करने में असमर्थ ना हो पत्रकारों के बच्चों के लिए केंद्रीय विद्यालयों मे भारती कोटा होना चाहिये क्युकी पत्रकारों को इतनी तन्खुवा नहीं मिल पाती जिससे की वह अपने बच्चों को अच्छे स्कूल मे पढ़ा सकें | आजादी की लड़ाई से लेकर आज तक मीडिया ने देश में हर छेत्र मे एक बहुत ही बड़ा किरदार निभाया है देश मे हुई क्रांति का बहुत बड़ा सहयोग मीडिया का रहा है जनता को हर सूचना मुहैया करना बॉर्डर से लेकर गली कुंचो तक मीडिया समाज की सेवा करता है प्रशासन की सभी जानकारियां जनता तक लेकर आता है देश की जनता की सभी परेशानियों को सरकार व सम्बंधित विभाग तक पहुंचता है पर फिर भी पत्रकारों की मांगों को कभी भी नज़रंदाज़ कर दिया जाता है |

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लंबे समय से देखा गया है जहां भी पत्रकारों ने भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाई वहां पत्रकारों का बुरा हश्र हुआ हाल ही की कुछ घटनाएं पूरी दुनिया को मालूम हुई उत्तर प्रदेश मे बिहार में बंगाल में महाराष्ट्र में कई पत्रकारों की हत्याएं हुई उसका दर्द कम नहीं हुआ है और दूसरे राज्यों से पत्रकारों की हत्याओं की खबरों ने दर्द और बढ़ा दिया पर देश की सरकार व राज्यों की सरकारों को ये सब दिखाई नहीं देता कई नेता यह भी कह देते हैं कि राजनीती में आने से पहले वह पत्रकार थे तो क्या उनका फर्ज नहीं बनता कि वह पत्रकारों के हित के लिए कुछ अच्छे कदम उठाएं राज्यसभा मे एक सदस्य पत्रकारों के बीच से बनाया जाता है पर हालत ऐसे हैं की किसी को पता भी नहीं है की पत्रकारों की आवाज़ उठाने वाला राज्य सभा सदस्य है कोन ?

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क्या मीडिया के लिए सरकार की कोई जिम्मेदारी नहीं बनती एक तरफ मीडिया को पत्रकारिता को देश के चौथे स्तंभ का दर्जा दिया गया है और एक तरफ चौथे स्तंभ की नीव को खोखला कर दिया गया है खैर इसमें कमी तो कुछ मीडिया संस्थानों की भी है पर उनका क्या दोष जो दिन रात सड़कों पर भागते रहते हैं जिनके लिए ना धूप है न अँधेरा न ठंड है न बारिश है सिर्फ और सिर्फ जनता की परेशानियों को समझना और उन परेशानियों से निजात दिलाना ही अपना कर्तव्य समझते हैं तो क्या ऐसे मीडिया कर्मियों के लिए देश में सुरक्षा कानून व जीवन सुरक्षा बीमा सरकार द्वारा नहीं होना चाहिए पहले भी हमने गुहार लगाई फिर से हम गुहार लगाएंगे हम अपने हक की लड़ाई जरुर लड़ेंगे और विश्वास करते हैं माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी पर कि वह पत्रकारों के हित के लिए जरूर कुछ ना कुछ कदम उठाएंगे और पत्रकारों की मदद करके देश के चोथे स्तंभ को मजबूत करेंगे |

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विपिन गौड़

पत्रकार , समाजसेवी , लेखक

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